वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र में अनधिकृत बांधकाम (अवैध निर्माण) और भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत के खिलाफ पत्रकार विनोद यादव का धरना प्रदर्शन लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा। पत्रकारिता के मंच से वर्षों से सच्चाई की आवाज बुलंद करने वाले विनोद यादव अब सड़कों पर उतरकर जनता के हक और कानून के सम्मान के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
धरने का मुख्य मुद्दा है – महानगरपालिका की मिलीभगत से हो रहे अनधिकृत निर्माण, जिनके पीछे लाखों-करोड़ों की भ्रष्टाचारी खेल छुपा है। पत्रकार विनोद यादव का आरोप है कि कुछ भ्रष्ट अधिकारी बिल्डरों और भू-माफियाओं के साथ मिलकर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। आवासीय क्षेत्रों में अवैध दुकानें, ऊंची इमारतें और खुले में व्यावसायिक निर्माण धड़ल्ले से चल रहे हैं, और महानगरपालिका की नाक के नीचे यह सब हो रहा है।
विनोद यादव का कहना है कि उन्होंने इन मामलों में कई बार महानगरपालिका को लिखित शिकायत दी, RTI लगाई और मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से जनता और अधिकारियों को जागरूक किया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल फाइलों का खेल चलता रहा। इसके विरोध में उन्होंने 5 दिन पहले नगर निगम कार्यालय के बाहर अनशन और धरना शुरू किया, जो अब जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है।
धरना स्थल पर वे पोस्टर लेकर बैठे हैं जिन पर लिखा है –
“भ्रष्ट अधिकारियों को बर्खास्त करो”,
“अवैध निर्माण बंद करो, नियमों का पालन करो”,
“सच की लड़ाई में साथ दो”।
विनोद यादव का कहना है, “यह लड़ाई सिर्फ मेरे लिए नहीं है, यह पूरे शहर के लिए है। अगर आज हम चुप रहे, तो कल हर गली-मोहल्ले में अवैध इमारतें खड़ी होंगी और हादसे होते रहेंगे। यह भ्रष्टाचार, केवल ईंट और सीमेंट का नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ है।”
पांच दिनों में कई सामाजिक कार्यकर्ता, आम नागरिक और पत्रकार उनके समर्थन में धरना स्थल पर पहुंचे हैं। सोशल मीडिया पर #VinodYadavSatyaKiLadai, #StopIllegalConstruction और #VVMCCorruption ट्रेंड कर रहे हैं।
इसके बावजूद वसई-विरार महानगरपालिका की तरफ से कोई ठोस आश्वासन या कार्रवाई का संकेत नहीं मिला है। अधिकारी मौन हैं और जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
यदि प्रशासन इस जनसंकल्प की अनदेखी करता रहा, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और तेज़ हो सकता है। पत्रकार विनोद यादव की यह लड़ाई केवल अवैध निर्माण के खिलाफ नहीं, बल्कि एक साफ, सुरक्षित और जवाबदेह शहर के भविष्य के लिए है।
