आजमगढ़ /रानी की सराय कृषि महाविद्यालय कोटवा के परिसर मे 7 जुलाई को वन महोत्सव सप्ताह कार्यक्रम के अन्तर्गत वृक्षारोपण किया गया। साथ ही पौध रोपित कर उसके संरक्षण का भी संकल्प लिया गया l
यह वृक्षारोपण महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो धीरेन्द्र कुमार सिंह के द्वारा किया गया जिसमें सभी शिक्षकगण, छात्र एवं अन्य कर्मचारीगण मौजूद रहे । अधिष्ठाता महोदय ने कहा कि हमें अधिक से अधिक पौधे रोपित करना चाहिए। ऐसा करने से लगातार बिगड़ रहे पर्यावरण को बचाया जा सकता हैंl जैसा कि हम जानते हैं कि भारतीय संस्कृति के अधिकतर त्योहार प्रकृति के साथ जुड़े हुए है। क्योंकि हम अपनी आवश्यता के लिए हमेशा प्रकृति पर निर्भर रहते है और उत्सवों के जरिये हम उनसे कृतज्ञता भाव अभिव्यक्त करते है। आपको अवगत करा दे कि भारत देश में वन महोत्सव की शुरुआत सन् 1950 में कृषि मंत्री डा. कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी द्वारा हुई थी। यह उत्सव प्रति वर्ष 1 जुलाई को वन महोत्सव दिवस के रूप में मनाया जाता है और एक सप्ताह तक चलता है। वनो को बचाना बेहद आवश्यक है। वनो को काटने से पृथ्वी पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। कई जीव जंतुओं की प्रजातियां विलुप्त हो रही है। पृथ्वी और पर्यावरण पर भयानक असर पड़ रहा है। समय रहते हम सभी को सचेत हो जाना चाहिए अन्यथा हम सब कुछ खो बैठेंगे और प्रकृति अपना विकराल रूप धारण कर लेगी। हमें कम से कम 1 पेड़ लगाकर उसकी देखभाल करनी चाहिए l
कृषि महाविद्यालय में पौध रोपित कर मनाया गया वन महोत्सव
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