झमाझम हुई बरसात से खिले किसानों के चेहरे, अंततः प्रकृति ने ही दिया साथ

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रिपोर्ट:जय प्रकाश श्रीवास्तव

आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लगातार दो दिनों से हो रही झमाझम बारिश से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। बताते चले कि किसानों की फैसले पूरी तरह से बर्बादी की कागार पर पहुंच चुकी थी पानी न मिलने के कारण धान की फसल पूरी तरह से चौपट होने के कगार पर थी किसान किसी तरह से जनरेटर हैंडपंप,टुल्लू पंप, मोटर,आदि से अपने खेतों में पानी पहुंचा रहे थे जो पर्याप्त नहीं थे। जगह-जगह पर नहरों में पानी ना पहुंचने से जहां किसान काफी नाराज थे साथ ही साथ बिजली आपूर्ति की समस्याएं बहुत ज्यादा थी जिसकी पूर्ति प्रकृति ने दो दिन के अंदर कर डाली इसीलिए कहा जाता है की प्रकृति के आगे सब कुछ फेल है। परंतु सरकार को इसके बारे में अवश्य सोचना पड़ेगा कि अधिकारियों की लापरवाही के वजह से इस प्रकार की परेशानियां पब्लिक को झेलनी पड़ रही है जो भविष्य में उन्हें मुश्किल में डाल सकता है। जहां जनता की मुख्य समस्या सड़क, पानी, बिजली और अनाज है जिसके बारे में सरकार को हमेशा गंभीरता पूर्वक विचार करना चाहिए अन्यथा ये उच्च पदों पर बैठे अधिकारीगण जिन्होंने किसानों की समस्याओं के बारे में सोचना लाजिम नहीं समझा वे अपनी लापरवाहियों से सरकार को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। किसान पानी के लिए तड़पते रहे पर नहरों में पानी नहीं भेजा गया। सड़कों की हालत यह है कि चलने लायक नहीं है लिंक रोड से लेकर शहरों की सड़के तक पूरी तरह से जर्जर हो चुकी है जिसके बारे में किसी को कोई चिंता नहीं है। खैर अभी तक मौसम विभाग के द्वारा दिनांक 26 सितंबर से 29 सितंबर तक तेज बारिश और आकाशीय बिजली के गिरने की चेतावनी भी दी गई है।

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