धनुष के टूटते ही जनक पुर वासी अत्यंत प्रसन्न हो गए और भगवान को धन्यवाद देने लगे ।क्योंकि स्वयंवर में सभी राजाओं के बाद विवाद तथा विषाद को सुनकर सभी जनक पुर वाले काफी चिंतितऔर व्यथित हो गए थे। उक्त संबोधन है कथा वाचिका मानस मर्मज्ञ तथा श्री राम कथा शोधिका रागिनी मिश्रा के ।वे नगर के सिद्ध स्थल श्री शीतला माता धाम में आयोजित साप्ताहिक श्री राम कथा के अनंतर भक्तो के बीच उक्त सद्विचार व्यक्त कर रही थी । कथा वाचिका मिश्रा ने कथा को भावुक बनाते हुए अयोध्या वासियों के बारात जाने के तैयारी का वर्णन करते हुए बताया कि सारे अयोध्या वासी चीटियो की तरह पक्ति बद्ध होकर गाते बजाते जनक पुर चल दिए ।पहली बारात ऐसी थी जो बिना दूल्हा और बिना विवाह की तारीख के चल दिया l कुछ समय बाद भरत जी को दूल्हा तथा शत्रुघ्न जी को सह बाला महाराज वशिष्ठ के सलाह पर बनाया गया।
श्रीr राम कथा के अनंतर व्यास जी ने कहा कि श्री राम चरित मानस का प्रत्येक पात्र प्रेम सद्भाव त्याग और विश्वास का संदेश देता है ।जीवन के हर क्षेत्र में राम चरित मानस की शिक्षा काम करती है ।इस अवसर पर नगर केधार्मिक और सामाजिक सेवाओं के प्रतिमूर्ति सर्वदानंद बरनवाल तथा जनपद के वरिष्ठ शल्य चिकित्सक डा एस सी तिवारी मुख्य यजमान रहे ।इस अवसर पर मंदिर समिति के बल्लभ दास गुजराती रामकेर विश्वकर्मा काशी नाथ पटवा संजय कुमार संजू रितेश कुमार मुख्य आयोजन कर्ता मदन जी देववंशी डा रामगोपाल दिलीप मद्धेशिया गिरधर गुप्ता समेत हजारों नर नारी मुग्ध होकर कथा तथा भजन का आनंद ले रहे थे।

