गंभीरपुर आजमगढ़। पुत्र की लंबी उम्र की कामना के लिए शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रो मे व्रती महिलाओ ने पूजन अर्चन की इसी क्रम मे गंभीरपुर, बिषया, बसिरहा,रानीपुर रजमो, उत्तरगावा, बिंद्राबाजार, मुहम्मदपुर, दयालपुर, सिंघड़ा, अरारा, बेलऊ समेत अनेक गावों मे व्रती महिलाओं ने शुक्रवार की शाम को मंदिरो मे गोठ बनाकर पूजन अर्चन की।बताते चले की महापर्व छठ के बाद जितिया को ही सबसे कठिन व्रतों में से एक माना गया है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और स्वस्थ जीवन के लिए 24 घंटे का निर्जला उपवास करती हैं। हर साल अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन जीवित्पुत्रिका का व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जितिया व्रत को करने से संतान दीर्घायु होते हैं और उनपर आने वाला हर संकट टल जाता है। जितिया व्रत को कई जगह जीवित्पुत्रिका और जीउतिया के नाम से भी जाना जाता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के दौरान जब द्रोणाचार्य की मृत्यु हुई तो इसका बदला लेने के लिए उनके पुत्र अश्वत्थामा ने क्रोध में आकर ब्रह्मास्त्र चला दिया, जिसकी वजह से अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उत्तरा की संतान को फिर से जीवित कर दिया। बाद में उस बच्चे का नाम जीवित्पुत्रिका रखा गया। कहते हैं कि तभी से अपनी संतान की लंबी आयु के लिए माताएं जितिया का व्रत करने लगी।

