रामायण सौहार्द और सामंजस्य बढ़ाता है। वाल्मीकि रामायण के सुनने मात्र से महाराज सुमति और ब्राम्हण

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रामायण सौहार्द और सामंजस्य बढ़ाता है। वाल्मीकि रामायण के सुनने मात्र से महाराज सुमति और ब्राम्हण सौदास केपापो का नाश हो गया ।इसके साथ साथ महर्षि नारद जी के सत्संग से डाकू वाल्मीकि महर्षि बन गए।उक्त उदगार है वृंदावन से पधारे आचार्य अरूण जी महाराज के ।वे नगर के बालनिकेतन् रेलवे क्रॉसिंग श्री हनुमान गढ़ी मंदिर पर आयोजित श्री वाल्मीकि रामायण पाठ के अनंतर उक्त विचार व्यक्त कर रहे थे।कार्यक्रम के पूर्व आचार्य जी का मंदिर के प्रमुख आनंद गुप्त और अनिल शर्मा ने स्वागत तिलक लगाकर किया ।
इस अवसर पर आचार्य जी ने बाल्मीकि रामायण की महिमा का बखान करते हुए कहा कि श्री राम जी सहित चारों भाइयों की धर्म का निरूपण बाल्मिकी रामायण में विस्तार से किया गया है। महर्षि श्रृंगी के सलाह देने पर अयोध्या नरेश दशरथ जी महाराज ने पुत्र कामेष्टि यज्ञ की अधिकार हेतु अश्वमेध यज्ञ तथा पुत्र प्राप्ति यज्ञ कराया। अंत में आरती तथा भजन किया गया ।इस अवसर पर मुख्य रूप से बब्बन सिंह संजय सर्राफ मोती चंद चौरसिया श्री राम लोहिया आनंद गुप्ता राजेश गुप्ता आदि मौजूद रहे ।

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