सामाजिक और धार्मिक सेवाओं के प्रति मूर्त थे अशोक बाबू।मृदु स्वभाव के धनी तथा समरसता और सहजता उनके अंदर कूट कूट कर भरी हुई थी।उक्त विचार है अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल जनपद मऊ के अध्यक्ष तथा अखिल भारतीय मध्य देशीय वैश्य महासभा के प्रमुख डा रामगोपाल के ।वे रौजा स्थित निवास पर मध्यदेशीय वैश्य महासभा तथा अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के द्वारा आयोजित संयुक्त शोक सभा में उक्त विचार व्यक्त कर रहे थे। डा गुप्त ने कहा स्वर्गीय अशोक जी सामाजिक कार्यों के प्रति सदैव समर्पित रहते थे ।मध्यदेशीय समाज अतिथि भवन के निर्माण में उनकी महत्व पूर्ण भूमिका थी ।इसके साथ साथ धार्मिक कार्यों में भी वे आर्यसमाज के माध्यम से घर घर में यज्ञ हवन ज्ञान बाटते रहे । आर्य समाज द्वारा संचालित महर्षि दयानंद बाल विद्या मंदिर के फाउंडर सदस्य रहे ।विद्यालय के खुलने पर सर्व प्रथम इन्होंने अपने घर के सारे कुर्सी और टेबल विद्यालय को समर्पित कर दिया। 75वर्ष की आयु में भी वे बाबा सरजू मध्यदेशीय वैश्य अनाथाश्रम करजौली खुरहट में वृक्षारोपण कर उसे हरा भरा बनाने में सकारात्मक सोच को मूर्त रुप दिया । स्वर्गीय अशोक जी के सुकृत्यो से प्रेरित उनके ज्येष्ठ पुत्र आनंद कुमार ने पत्रकारिता और व्यापार मंडल के माध्यम से व्यापारियों के सेवा तल्लीनता से करते है । स्वर्गीय अशोक गुप्ता के सुकृत्यो का समग्र व्यापारी तथा वैश्य समाज सदैव ऋणी रहेगा। डा गुप्त ने कहा कि उनके निधन से समग्र समाज की अपूरणीय क्षति हुई है ।ज्ञातव्य हो कि अशोक गुप्ता का निधन विगत 31अक्टूबर को स्थानीय फातिमा अस्पताल में इलाज के दौरान हो गया था।उनका अंतिम संस्कार आर्य समाज रीति से सर्वश्वरी मुक्ति धाम ढेकूलिया घाट पर किया गया ।वे अपने पीछे पुत्र पुत्रियों तथा प्रपौत्र आदि से भरा पूरा परिवार अपने पीछे छोड़ गए है ।
इस अवसर पर मुख्य रूप से अजहर फैजी आनंद गुप्त ध्रुव नारायण गुप्ता विनय कुमार श्रीवास्तव प्रदीप सिंह विनय जायसवाल श्री राम लोहिया सोनू दुबे सुरेंद्र गुप्ता ज्ञानू सिंह महातम यादव नीरज अग्निवेश अशोक सिंह संजय सर्राफ सौरभ मद्धेशिया अभिषेक मद्धेशिया डा पवन मद्धेशिया डा पी एल गुप्ता समेत सैकड़ों लोग शोक सभा में मौजूद रहे ।
अंत में दो मिनट का मौन रखकर गत आत्मा की शांति के लिए प्रभु से प्रार्थना की गई ।
सामाजिक और धार्मिक सेवाओं के प्रति मूर्त थे अशोक बाबू।मृदु स्वभाव के धनी तथा समरसता और सहजता उनके अंदर कूट कूट कर भरी हुई थी
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