Greater Noida : एक तरफ सरकारी नौकरी पाने के लिए मारामारी का आलम है। चपरासी की पोस्ट पर मास्टर्स और पीएचडी आवेदन करते हैं। दूसरी तरफ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण में हुए भर्ती घोटाले से एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। अब पता चला है कि संविदा पर भर्ती हुए कर्मचारियों में कई तो ऐसे हैं, जो बैंक पीओ और सब इंस्पेक्टर की नौकरियां छोड़कर आए हैं। दरअसल, यह सारे लोग अथॉरिटी में व्याप्त भ्रष्टाचार से वाकिफ हैं और के रातों-रात करोड़पति बनने की फिराक में हैं। अब मामले की जांच शुरू हुई है तो परत दर परत नए खुलासे हो रहे हैं।
खबरों पर संज्ञान लेते हुए शासन ने प्राधिकरण को जांच का आदेश दिया है।
भ्रष्टाचार के जरिए करोड़पति बनने की चाहत अथॉरिटी लेकर आई
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के नियुक्ति घोटाले में हर रोज नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अथॉरिटी में जैम पोर्टल और संविदा के जरिए हुई फर्जी नियुक्तियों में अस्थाई नौकरियां हासिल करने वाले लोगों ने सरकारी प्रमानेंन्ट नौकरी छोड़ी हैं। इन 70 लोगों में कई तो ऐसे हैं, जो पहले से बैंक में पीओ, बार्डर पुलिस में सब इंस्पेक्टर और दूसरे सरकारी महकमों में कई अच्छी पोस्ट पर नियुक्त थे। लेकिन इनका मकसद फर्जीवाड़े करके रातोंरात करोड़पति बनना है। यही चाहत इन लोगों को ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी तक ले आई है।
शासन और सीईओ को नियुक्तियों की जानकारी नहीं दी गई
यह भी बात सामने आ रही है कि सरकारी नौकरी छोड़कर अथॉरिटी की नौकरी पाने के लिए लाखों रुपये नौकरी दिलवाने वाले दलालों को दिए गए हैं। फर्जी तरीके से नौकरी पाने वालों के अब होश फाख्ता हो रहे हैं। दरअसल, योगी आदित्यनाथ सरकार ने जांच का फैसला लिया है। इसके लिए शासन के अनुसचिव की ओर से ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी के मुख्य कार्यपाल अधिकारी को पत्र भेजा गया है। जिसमें अथॉरिटी में हुई नियुक्तियों की जांच करके दो दिन में शासन को अवगत कराने का आदेश दिया गया है। मिली जानकारी के मुताबिक रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। खास बात यह है कि यह नियुक्तियां गुपचुप तरीके से की गई हैं। इनके बारे में ना तो प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को पता था और ना ही शासन को जानकारी दी गई है।
एसीईओ ने नियुक्तियां कीं और खुद ही सीनियर मैनेजर को जांच सौंप दी
सरकार की ओर से आर्डर आने से पहले ही ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी में तैनात एसीईओ अमनदीप दुली ने जांच के आदेश दिए थे। इसके लिए जांच अधिकारी एसएम (टैक्निकल) एके जोहरी को बनाया गया था। लेकिन लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए कि अपने से कई पद सिनियर फर्जी नियुक्ति करने वाले अधिकारियों की जांच जूनियर कैसे कर सकता है? मेरठ मेडिकल के रहने वाले नील कमल का कहना है, “वह इस तरह की जांच से संतुष्ट नहीं हैं। फर्जी तरीके से नियुक्ति करने वाले अधिकारियों के खिलाफ जब तक कार्रवाई नहीं हो जाती और नियुक्तियां रद्द नहीं की जाती हैं, तब तक वह इस घोटाले के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे। नीलकमल का कहना है कि नियुक्तियां अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी करते हैं और उसमें हुई धांधली की जांच सीनियर मैनेजर को दे देते हैं। वह केवल आम आदमी की आंखों में धूल झोंक रहे हैं।
