अक्षय नवमी के दिन पूजा तर्पण तथा दान करने से नाम के अनुरूप अक्षय तथा अनंत फल की प्राप्ति होती है

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अक्षय नवमी के दिन पूजा तर्पण तथा दान करने से नाम के अनुरूप अक्षय तथा अनंत फल की प्राप्ति होती है ।कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि से ही द्वापर युग का प्रारंभ हुआ था। शास्त्रों के अनुसार योगीराज महाराज श्री कृष्ण के द्वारा कंस का वध आज ही के दिन कर धर्म की स्थापना पृथ्वी पर हुई थी। उक्त विचार हैं श्री हनुमान गढ़ी मंदिर सेवा समिति रेलवे क्रॉसिंग बाल निकेतन के प्रमुख तथा श्री हनुमत कृपा सेवा समिति व श्री सुंदर काण्ड पाठ परिवार के प्रमुख डा रामगोपाल गुप्ता के ।
वे श्री हनुमानगढ़ी मंदिर पर अक्षय नवमी के अवसर पर आयोजित श्री सुंदरकांड पाठ के पश्चात उक्त विचार व्यक्त कर रहे थे ।डॉक्टर गुप्त ने कहा कि अक्षय नवमी के दिन ही महाराज विष्णु भगवान पृथ्वी पर आंवला की वृक्ष से प्रकट हुए थे। इसी कारण नवमी तिथि से पूर्णिमा तक आंवला के वृक्ष के नीचे भोजन करने की परंपरा प्रारंभ हुई ।इस अवसर पर समिति के प्रमुख बब्बन सिंह ने कहा कि द्वापर युग की शुरुआत आज ही के दिन से हुई थी इस कारण यह शुभ दिन पर श्री सुंदरकांड का पाठ पढ़ने से जीवन में अद्भुत ऊर्जा उत्पन्न होती है। इस अवसर पर इस अवसर पर समिति के अनुपम पांडे तथा अर्जुन राजभर एवंअजय मिश्र ने सुंदर राग में सुंदरकांड का पाठ एवं भजनों की लड़ी प्रस्तुत किया। पाठ में प्रमुख रूप से विनोद कुमार गुप्ता अनिल शर्मा डा रमेश कुमार शर्मा तथा ओमप्रकाश प्रजापति व संजय सराफ का प्रमुख योगदान रहा।
इस अवसर पर समिति के प्रमुख श्री राम लोहिया ने अक्षय नवमी की सबको बधाई एवं शुभकामना देते हुए आशीर्वाद प्रदान किया। इस मौके पर धनराज राजभर रघुनाथ चौहान त्रिभुवन वर्मा राजेंद्र वर्मा राम प्रसाद राजेश होटल मोती लाल विश्वकर्मा तरुण कुमार राजेश क्षीतिजा पंकज कुमार ओम प्रकाश मुरली मिश्र शिव शंकर सिंह स्वामी नाथ गुप्ता समेत कई लोग मौजूद रहे ।

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