आस्था के जीते-जागते उदाहरण हैं पौहारी बाबा
रिपोर्ट:जय प्रकाश श्रीवास्तव
बोगरिया आजमगढ़। कहा जाता है कि संसार में दो प्रकार के लोग पाए जाते हैं एक आस्तिक और दूसरे नास्तिक। जिन्हें भगवान पर विश्वास होता है उन्हें आस्तिक कहते हैं और जिन्हें भगवान पर विश्वास ही नहीं होता है उन्हें नास्तिक कहते हैं। इस तरह की आस्था बोगरिया के पास ग्राम मठिया में बसे हुए पौहारी बाबा मंदिर में देखा जाता है। वैसे तो यहां मंगलवार और रविवार को भक्तों का रेला लगा रहता है। परंतु अब इस प्रकार की आस्था हो चुकी है कि प्रत्येक दिन यहां पर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि यहां पर भक्त जो भी मुरादे मांगते हैं वह अवश्य ही पूरा होता है।अगर इसके सत्य को जानना है तो आप इस मंदिर में चढ़ाए गए घंटों को देख सकते हैं यहां पर हजारों की संख्या में घंटे चढ़े हुए हैं यह वह घंटे हैं जिन लोगों की आस्था पौहारी बाबा पर है और उनकी मुरादे पूरी हो चुकी है। यहां का नियम है कि पौहारी बाबा मंदिर में आप सर्वप्रथम जो भी मन्नत मांगेंगे वह अवश्य पूरा होगा और पूरा होने के बाद आपको घंटा, लंगोट और खड़ाऊ, प्रसाद चढ़ाना पड़ेगा। एक तरफ लोग इस समय को कलयुग कहते हैं जहां तमाम हिंसा अपराध और गलत कार्य हो रहे हैं वहीं पर भगवान की आस्था में भी लोगों का विश्वास बढ़ता चला गया और जगह-जगह पर पूजा पाठ हवन रामायण पाठ,रामचरितमानस पाठ,आदि इस तरह के पाठ कराए जा रहे हैं पौहारी बाबा मंदिर पर भी प्राय कोई भी ऐसा दिन नहीं बचता जब यहां पर किसी के द्वारा कीर्तन न कराया जाए इस तरह से इस क्षेत्र में पौहारी बाबा का नाम भी लिया जाता है किसी भी कार्य में लोग पौहारी बाबा का नाम लेकर ही अपने कार्य को संपन्न कराते हैं। मंदिर की देखरेख में ग्राम मठिया के लोग अपना अपना समय निर्धारित करके बाबा की सेवा करते हैं। यहां पर ब्राह्मण लोगों की कतारें लगी रहती है जो लोग यहां पर आए हुए सभी भक्तों का पूजा पाठ करवाने में पूर्ण सहयोग करते हैं।इस तरह से देखा जाता है कि पौहारी बाबा मंदिर आस्था का जीता जागता उदाहरण हैं।
