श्री मदभागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य के जीवन की सारी व्यथाएं स्वतः समाप्त हो जाती है ।राम कथा सुनने से विशेष रस राम रस की प्राप्त होती है सभी रस का स्वाद समाप्त हो जाता है। उक्त विचार हैं वृंदावन से पधारे हुए परम श्रद्धेय भार्गव मनीष जी महाराज की। वे मऊ नगर की पूर्वी छोर पर श्री हनुमान नगर में आयोजित श्री भागवत कथा के अनंतर उक्त विचार व्यक्त कर रहे थे। भक्तों को संबोधित करते हुए श्री महाराज ने कहा कि नारायण मात्र नाम जपने से ही मनुष्य भवसागर से पार हो जाता है। उन्होंने कहा कि हिरण्य कश्यप अपने राज्य में छल कपट ईर्ष्या विद्वेष पर विशेषज्ञता प्राप्त करने का विश्वविद्यालय खोल रखा था जिसमें उक्त विषयों की पढ़ाई होती थी और राक्षसी प्रवृत्ति को बढ़ावा देने की शिक्षा दी जाती थी । इस अवसर पर गुरु की महत्ता का वर्णन करते हुए कहा कि नारद ऋषि ने भक्त प्रह्लाद को ॐ नमो भगवते वासुदेवाय महा मंत्र देकर मालामाल कर दिया।कथा के अनंतर श्री कृष्ण जन्मोत्सव की झांकी सजाई गई जिसपर नगर के संजय सर्राफ रवि प्रकाश बरनवाल डा रामगोपाल अवध बिहारी पांडेय आनंद गुप्त तथा दर्जनों लोगों ने न्योछावर बाटा तथा बधाई देते हुए महिलाओं ने सोहर गीत गया । अंत में नंद के घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की भजन पर सभी श्रोता थिरकने के लिए मजबूर कर दिया ।इस अवसर पर मुख्य रूप से राम अवध सिंह राधेश्याम जायसवाल काजू बरनवाल दीप गुप्ता मनोज चौबे अर्जुन राजभर विनोद भोले समेत सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
श्री मदभागवत कथा सुनने मात्र से मनुष्य के जीवन की सारी व्यथाएं स्वतः समाप्त हो जाती है ।राम कथा सुनने से विशेष रस राम रस की प्राप्त होती है
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