ब्रह्म कुमारी शिवानी दीदी के वाणी सारांश

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ब्रह्म कुमारी शिवानी दीदी के वाणी सारांश
संकलन डा रामगोपाल
खुशियों का उपहार
संस्मरण-
ब्रह्म कुमारी बहन शिवानी
खुशी हर ब्यक्ति के अंदर है।बाहर ढूंढने की जरूरत नहीं है।बाह्य चीजें केवल आराम देती हैं और उल्टा धनोपार्जन की मृगतृष्णा पैदा करती हैं जिससे मानसिक तनाव पैदा होता है परिणामस्वरूप खुशी गायब हो जाती है।
हर ब्यक्ति केवल एक आत्मा है ।शरीर नश्वर है।आत्मा अजर, अमर ,अविनाशी है।सब कुछ छोड़कर आत्मा दूसरे शरीर में प्रवेश करती है।आत्मा के साथ अपने कर्म एवं संस्कार ही केवल जाते हैं जो दूसरे शरीर में प्रवेश करते हैं।अर्थात् पैदाइशी संस्कार पूर्व जन्म के कर्म और संस्कार हैं।
आत्मा का अंतिम घर परमात्मा हैं।कोई भी आत्मा जब परमात्मा से निकलकर अपनी बहुत लम्बी यात्रा पर निकलती है तो वह सतोगुणी होती है।एक शरीर से दूसरे शरीर की यात्रा में कर्म और संस्कार उसमें प्रवेश करते हैं ।इन कर्म एवं संस्कारों से आत्मा तीन रूप सतोगुणी,रजोगुणी एवं तमोगुणी का निर्माण होता है।हमेशा खुश रहने के लिए आत्मा के मूल स्वरूप अर्थात् सतोगुण को सुरक्षित रखना है।
सतोगुण को सुरक्षित रखने के लिए हम प्रतिदिन यह प्रतिज्ञा लेकर निकलें कि इस साफ आत्मा पर कोई दाग नहीं लगने देंगे।दाग लगने पर तुरंत साफ कर देंगे।अर्थात् अवगुणों को तुरंत चिन्हित कर बाहर का रास्ता दिखा देंगे।
मृत्यु साश्वत सत्य है।मृत्यु किसी भी छण हो सकती है।यह भी सत्य है कि आत्मा के साथ केवल कर्म और संस्कार ही जाते हैं ।अतः हमें हर छण आत्मा को बेदाग रखना है।
हमेशा अच्छे आचरण युक्त सीरियल एवं मूवी देखना एवं साहित्य पढ़ना है।अन्यथा यह हमारे आत्मा को दूषित कर खुशियां गायब कर देगा।नये जमाने के चमत्कार स्मार्ट मोबाइल फोन पर आने वाले बुरे संदेश तुरंत डिलीट कर दें एवं भूलकर भी फारवर्ड नहीं करें अन्यथा खुद के अलावा हजारों की खुशी गायब होगी।
अपने लाइफस्टाइल को बदलें।सायं जल्द (लगभग 10.00 बजे) सोयें एवं ब्रह्म मुहूर्त (लगभग सुबह 4.00 और 5.00 बजे के बीच ) उठ कर पहले परमात्मा को सुबह उठने के लिए धन्यवाद दें।सुबह अच्छे विचारों का चिन्तन-मनन करें।सायं सोने से पहले अपनी उस दिन की दिन- चर्या का सिंहावलोकन कर गलतियों को स्वीकार कर मांफी मांगकर अपनी आत्मा को शुद्ध कर लें।यह आपको असीम खुशियां देगा।
खुशी का मूल आधार व्यवहार है।आये दिन हम अपने व्यवहार से खुद एवं दूसरे की खुशी छीन लेते हैं।ज्यादातर हमारी खुशी परिस्थित (पर-स्थित)पर निर्भर हो गयी है।अगर सामने वाले की जगह हम अपनी स्थित को ठीक रखें अर्थात् खुशी का रिमोट कंट्रोल उससे छीनकर अपने पास रख लें तो हमेंशा खुश रहेंगे।इसके लिए अपनी कमियों को दूर कर केवल और केवल पॉजिटिव बिचार ग्रहण करें।निगेटिव बिचारों को बाहर का रास्ता दिखावें।
खुशियों पर ग्रहण लगाने का काम आने वाले धन की गुणवत्ता पर भी निर्भर करता है।धन का स्रोत कभी भी दूसरों को दुःख देकर नहीं होना चाहिए। क्यों कि-
जैसा धन ,वैसा अन्न।
जैसा अन्न ,वैसा मन।
जैसा मन,वैसा शरीर।
जैसा शरीर, वैसा स्वास्थ्य।
जैसा पानी, वैसी बानी।
हमेंशा सात्विक भोजन एवं केवल शुध्द जल लें।
सदाबहार खुशी के लिए उपरोक्त बहन शिवानी के विचारों का अमल करें।
राज योग सीख कर, प्रतिदिन उसका अभ्यास करें और अपार खुशियां प्राप्त करें।
डा. राम गोपाल

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