आयुर्वेद की कड़ी में आज रसोई घर से शीतल मिर्च के सामान्य गुण धर्म एवं छोटी-छोटी बीमारियों में इसके परम्परागत किन्तु वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में प्रामाणिक सिद्ध औषधोपयोगी गुणों की जानकारी प्रस्तुत है…..

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सेहत

  • आयुर्वेद की कड़ी में आज रसोई घर से शीतल मिर्च के सामान्य गुण धर्म एवं छोटी-छोटी बीमारियों में इसके परम्परागत किन्तु वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में प्रामाणिक सिद्ध औषधोपयोगी गुणों की जानकारी प्रस्तुत है…..

  • शीतल मिर्च को कबाब चीनी के नाम से भी जाना जाता है जो कालीमिर्च के आकृति की होती है। इसके बीज और बीजों के तैल का उपयोग किया जाता है। इसकी एक विशेष मनोहारी तीक्ष्ण गन्ध होती है जो मुख में रखने से स्वाद में चरपरी और जिह्वा पर ठंडी लगती है। यह शीतल एवं थोड़ी उष्ण और वातानुलोमक (वायु की गति को नीचे की ओर करने वाली) होती है।
    अब शीतल मिर्च के सामान्य रोगावस्था में कुछ छोटे-छोटे घरेलु उपचार प्रस्तुत हैं जिन्हें अपनाकर आप लाभ उठा सकते हैं लेकिन विशेष गंभीरावस्था में कुशल चिकित्सकसे अवश्य ही परामर्श लेना चाहिए।

१. स्वप्नदोष (कामुक विचार से युवाओं में नींद में होने वाले वीर्यस्राव) में शीतल मिर्च बीज चूर्ण में बराबर मात्रा मीठा सोडा (खाने वाला सोडा) मिलाकर सुबह-शाम ३-३ ग्राम की मात्रा में जल से लेने से और कामुक विचारों का त्याग करने से शीघ्र ही उत्तम लाभ होता है।

२. मुखपाक (मुँह के अंदर जिह्वा आदि पर छाले होना) में शीतल मिर्च के कुछ दाने मुँह में रखकर थोड़ी देर चबाकर थूक देने से तत्काल आराम मिलता है।

जय आयुर्वेद

डा रामगोपाल गुप्त
बी ए एम एस
एस वाई एन ए आयुर्वेदिक कालेज
भागलपुर

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