रिपोर्ट:जय प्रकाश श्रीवास्तव
मेहनगर ,आजमगढ़।
चार दिवसीय आस्था का महापर्व छठ पूजन के तीसरे दिन सोमवार के दिन अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ दिया गया। छठ माता के पूजन उत्सव में जगह-जगह घाटों पर लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। छठ पूजन उत्सव में संध्या अर्घ का भी अपना एक महत्व है। छठ पूजा के तीसरे दिवस महिलाएं सुबह नहा धोकर के शुद्ध कपड़े धारण कर छठ पूजा की तैयारी करती हैं और शाम को जल के अंदर खड़े होकर के सूर्य देव से प्रार्थना करती हैं कि उनके परिवार,रिश्तेदार,मित्र,दोस्त घर के सभी लोग सुखी,संपन्न और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ते रहे।अगले दिन सुबह महिलाएं उगते सूर्य को अर्घ देकर 36 घंटे का व्रत समाप्त करती हैं। इस व्रत का महत्व पूरे भारत ही नहीं बल्कि भारतीय लोग विश्व में जहां भी रहते हैं इस त्यौहार को बड़े ही श्रद्धा के साथ मनाते हैं वहीं अब देखा जा रहा है कि शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस त्यौहार का बड़ा महत्व है,इस त्यौहार में श्रद्धालुओं की संख्या धीरे-धीरे बढ़ती चली जा रही है यह त्यौहार मुख्य रूप से बिहार में शुरू किया गया था जो धीरे-धीरे पूरे भारत में लोगों की श्रद्धा का केंद्र बन गया। इसी क्रम में आजमगढ़ जनपद के मेंहनगर तहसील क्षेत्र के रासेपुर शिव मंदिर पोखरा, मानपुर मठिया में स्थित पौहारी बाबा मंदिर के पोखरे पर,रायपुर पट्टी के काली माता मंदिर पोखरे पर बैजनाथपुर मंदिर पोखरे पर लोगों का जन सैलाब उमड़ पड़ा। छठ पूजा में सुरक्षा की दृष्टि से हर घाटों पर पुलिस बल तैनात किया गया था। घाटों पर महिलाएं छठी माता के गीत गाकर के बड़े ही श्रद्धा के साथ पूजन कार्य कर रही थी। घाटों पर डीजे की धुन में लोग थिरक रहे थें। चारों तरफ वातावरण छठी माता की गीत से श्रद्धालुओं के मन को मोहित कर रहा था।







