गुरु बिन भव निधि तरई न कोई अर्थात बिना गुरु के ज्ञान के मनुष्य इस भव सागर अर्थात माया के

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गुरु बिन भव निधि तरई न कोई अर्थात बिना गुरु के ज्ञान के मनुष्य इस भव सागर अर्थात माया के सागर से पार नहीं हो सकता है।जीवन में गुरु का होना जरूरी है।गुरु ही ज्ञान के माध्यम से जीवन के अज्ञान रूपी अंधकार को समाप्त करअंतर्मन को प्रकाशित करता है ।उक्त विचार है अयोध्या से आए प्रकांड विद्वान मानस मर्मज्ञ परम पूज्य श्री किशोरी शरण जी महाराज के ।वे नगर के सिन्धी कालोनी में श्री दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर शहर कोतवाली द्वारा आयोजित श्री राम कथा महा यज्ञ के अंतर्गत गुरु की महिमा का बखान भक्तों के बीच कर रहे थे। परम पूज्य ने कहा कि जीवन में गुरु का रहना सबसे आवश्यक है जीवन की सबसे पहली गुरु माता पिता होते है ।उन्होंने कहा कि गुरु को ब्रह्मा विष्णु और शंकर और परम ब्रह्म परमात्मा की संज्ञा दी गई है ।श्री राम कथा प्रारंभ होने के पूर्व श्री हनुमत कृपा सेवा समिति के सुंदर काण्ड पाठ परिवार के हनुमान गढ़ी मंदिर समिति के सदस्यों द्वारा श्री सुंदर काण्ड का संगीतमय पाठ आयोजित किया गया।इस अवसर पर मंदिर के प्रधान सेवक विवेकानंद पाण्डेय तथा कार्यक्रम व्यवस्थापक छवि श्याम शर्मा सभी आगंतुकों अंग वस्त्रम देकर सम्मानित किया औरचंद्र शेखर अग्रवाल कैलाश चंद जायसवाल रामप्यारे गुप्ता बबलू शाही शिवधर यादव आदि ने व्यास जी की आरती उतारी ।कथा के दौरान बीच बीच में भजनों पर श्रोता गण झूमते रहे।इस अवसर पर मुख्य रूप से राजकुमार खंडेलवाल डा रामगोपाल रवि प्रकाश बरनवाल अरुण कुमार आर के सिंह सुनील चौबे रिंकू मिश्रा अनिल शर्मा तरुण कुमार ओम प्रकाश प्रजापति विजय कुमार पंकज राजभर मनोज तिवारी अनुपम पाण्डेय अर्जुन राजभर आशीष सिंह मोती लाल विश्वकर्मा अजय मिश्र बब्बन सिंह किशुन जी बरनवाल देवेंद्र मोहन सिंह

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