रामायण त्याग तपस्या प्रेम तथा समरसता और सद्भावना के साथ आदर्श की शिक्षा देता है और वहीं गीता

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रामायण त्याग तपस्या प्रेम तथा समरसता और सद्भावना के साथ आदर्श की शिक्षा देता है और वहीं गीता कर्म के प्रति निष्ठा रखते हुए धर्म के पालन और अधिकारका यथार्थ ज्ञान देता है ।उक्त दार्शनिक विचार है अयोध्या की पावन भूमि से पधारे श्री किशोरी शरण जी महाराज के ।वे नगर के हृदय स्थल सिंधी कालोनी में श्री राम कथा रूपी महा यज्ञ में भक्तों को ज्ञान की आहुति देते हुए उक्त विचार व्यक्त कर रहे थे। श्री व्यास जी महाराज ने बताया कि गीता में सोलह अध्यायों की शिक्षा देने के बाद अर्जुन का मोह भंग हुआ और युद्ध के लिए कमर कस लिया जब कि ठीक इसके विपरीत मिथिला में धनुष भंग होने से क्रुद्ध भगवान परशुराम को श्री राम जी ने 16दोहा में विनम्रता तथा समर्पण और प्रेम की बात कर इतना प्रभावित कर दिया कि वे अपने सभी अस्त्र शस्त्र अभिमान और क्रोध छोड़ कर इंद्र लोक चले गये। श्री महाराज ने बताया कि इतिहास में पहली बार बिना दूल्हे की बारात अयोध्या से मिथिला के लिए हाथी घोड़ा और रथ पर सवार होकर चली ।
गुरुदेव ने विवाह की रीतियों का स्वागत गीत का सजीव चित्रण किया।आज मिथिला नगरिया निहाल साखियां भजन पर सभी श्रोता गण झूमते रहे।इस अवसर पर श्री दक्षिणेश्वर हनुमान मंदिर के पुजारी विवेकानंद पाण्डेय ने सभी सनातनियों का स्वागत अभिनंदन किया।श्रोताओं में मुख्य रूप से अजय मिश्र बब्बन सिंह अनिल शर्मा डा रामगोपाल डा कुसुम वर्मा देवेंद्र मोहन सिंह आनंद गुप्ता कैलाश चंद जायसवाल पंकज जायसवाल श्रवण मद्धेशिया अमित शर्मा राजेश गुप्ता आर के सिंह अरुण कुमार पुनीत श्रीवास्तव राजेश श्रीवास्तव गिरधर गुप्ता राम आशीष दूबे समेत हजारों लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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