हिंदू सनातनियों को प्रेम धर्म तथा त्याग और कर्तव्यों की शिक्षा देने वाले महा काव्य रामायण की रचना

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हिंदू सनातनियों को प्रेम धर्म तथा त्याग और कर्तव्यों की शिक्षा देने वाले महा काव्य रामायण की रचना करने वाले वाल्मीकि महान ऋषि और महाकवि रहे । रत्नाकर खूंखार डाकू से ऋषि बनने वाले वाल्मीकि की रचना रामायण आज करोड़ों हिन्दू जन मानस के हृदय को अपनी आभा से आलोकित करती है। आज के दिन रामायण सुनना सुनाना तथा पढ़ना बहुत ही शुभ होता है। उक्त विचार है श्री हनुमत कृपा सेवा समिति के प्रमुख डॉ राम गोपाल गुप्त के ।वे बालनिकेतन स्थित श्री हनुमान गढ़ी मंदिर में मंगलवारीय श्री सुंदर काण्ड पाठ के दौरान महाकवि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उनके जीवन गाथा का वर्णन कर रहे थे। डा गुप्त ने कहा कि श्री राम की कथा का वर्णन करते हुए महर्षि वाल्मीकि ने सत्संग धर्म त्याग सेवा और सुमिरन के साथ साथ नैतिक मूल्यों की शिक्षा दिया ।इसी कारण महर्षि वाल्मीकि को हिंदू धर्म के पितामह की संज्ञा दी गई ।आज प्रभु के प्रति समर्पण से मरा मरा कहकर अमरता को प्राप्त कर धर्म पर चलने की प्रेरणा देने वाले 2000श्लोकों वाली रामायण की रचना कर हिन्दू जन मानस को कृत कृत कर दिया ।इस अवसर पर श्री सुंदर काण्ड का संगीतमय पाठ अजय मिश्र बब्बन सिंह रमेश शर्मा आशीष सिंह सुनील अनुपम पांडे रिंकू मिश्रा आनंद गुप्ता ने किया ।अंत में आरती और भोग के बाद प्रसाद वितरित किया गया । इस अवसर पर जय कृष्ण उपाध्याय जे एन सिंह सुरेश सिंह श्री राम लोहिया अनूप वर्मा तरुण कुमार मोती लाल विश्वकर्मा वीरेंद्र गुप्ता राम नरेश गुप्त पंकज राजभर सन्नी प्रजापति राजेश छतीजा विनोद कुमार सुधीर शुक्ला समेत बहुत से भक्त मौजूद रहे।

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