रिपोर्ट:जय प्रकाश श्रीवास्तव
बोगरिया,आजमगढ़:
आजमगढ़ जनपद के धनेहरी फीडर रासेपुर,जिसका मुख्य सप्लाई केंद्र जब से जहानागंज से मुबारकपुर कर दिया गया है तब से यहां की बिजली व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है आए दिन 33000 फॉल्ट बताया जाता है। इस संबंध में जब विभागीय अधिकारियों को फोन किया जाता है तो किसी के द्वारा फोन उठाया नहीं जाता ना कोई जवाब दिया जाता है। छोटे कर्मचारियों से बात करने पर पता चला कि कोई भी फॉल्ट 33000 में आने पर यहां से 60 से 70 किलोमीटर दूर मुबारकपुर शडडाउन लेने के लिए जाना पड़ता है उसके बाद फाल्ट को खोजा जाता है जिस वजह से ऐसी दिक्कतें आ रही हैं।जबकि धनेहरी फीडर पर कुछ दिन पहले ही मेगा विद्युत बिल समाधान शिविर लगाया गया था जिसमें ग्रामीणों ने मुबारकपुर से पुनः जहानागंज मुख्य सप्लाई करने की मांग की थी। जिस पर अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही उच्चाधिकारियों से बात करके व्यवस्था दुरुस्त कराया जाएगा परंतु अब आलम यह है कि रात-रात भर लाइट नहीं आ रही है ग्रामीण पूरी तरह से रात भर जाग करके बिता रहे हैं। ऊपर से प्रचंड गर्मी और मच्छरों का प्रकोप।क्या यह मुख्यमंत्री के आदेश जिसमें उन्होंने कहा है कि अत्यधिक प्रचंड गर्मी को देखते हुए बिजली व्यवस्था और अच्छी की जाएगी उसके एवज में रासेपुर धनेहरी फीडर से पूरी तरह से उदासीनता सामने दिखाई दे रही है।यहां लोगों का कहना है कि आए दिन केबल जल जाते हैं कहीं ना कहीं फॉल्ट रोजाना रहता है थोड़ी सी आंधी और बारिश आने पर 33000 फाल्ट हो जाता है और लगभग एक से दो दिन तक बिजली दुरुस्त करने में बीत जाता है। इस संबंध में जब धनेहरी फीडर के अवर अभियंता बीनू प्रसाद से बात की गई तो उन्होंने बताया कि मुबारकपुर से बिजली आने की वजह से यहां से काफी दूरी बन जाती है जिसको दुरुस्त करने में हम लोगों को 60 से 70 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है वहां से शडडाउन लेने के बाद तब फाल्ट को खोजा जाता है और बनवाया जाता है जिसमें बिजली विभाग के सभी छोटे-बड़े कार्यकर्ता दिन-रात मेहनत करते हैं तब जाकर के बिजली सुचारू रूप से मिल पाती है,अगर यह दूरी कम हो जाती जैसा कि ग्रामीणों का कहना है कि पहले मुख्य सप्लाई जहानागंज से आई थी अब इसे मुबारकपुर कर दिया गया है। अगर यही मुख्य सप्लाई पुनः जहानागंज कर दिया जाए तो हमें सुविधा देने में भी आसानी रहेगी। आखिर कब तक ग्रामीणों और बाजार वासियों को रात-रात भर जागना पड़ेगा गर्मी की हालत है कि पारा 46 डिग्री के करीब है। इसके संबंध में बात करने के लिए जब उच्चाधिकारियों को फोन लगाया गया तो किसी ने भी फोन नहीं उठाया अब देखना यह है कि उच्चाधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री के आदेश को गंभीरता से लिया जाता है या इस लापरवाही की जिम्मेदारी सरकार पर छोड़ दी जाती है।
