सेवानिवृत कर्मचारी संघ मऊ ने 12 सूत्रीय मांगो से संबंधित प्रधानमंत्री भारत सरकार व मुख्य्मंत्री उ प्र सरकार को सम्बोधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट मऊ को सौंपा

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यूपी मऊ। सेवानिवृत कर्मचारी एवं पेंशनर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश जनपद शाखा मऊ का एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी धरना प्रदर्शन श्रीराम सिंह की अध्यक्षता में व जिला संरक्षक सिताराम कुशवाहा के संचालन में जिलाधिकारी मऊ परिसर के धरना स्थल पर आज दिनांक 29.09.2026 को पूर्वांह 11 बजे से प्रारम्भ हुआ जिसमें 12 सूत्रीय मांगों पर वक्तावों नें अपने अपने विचार व्यक्त किये। उपरोक्त धरना सेवा निवृत कर्मचारी एवं पेंशनर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश के पत्र दिनांक 7 सितंबर 2026 के परिपालन में प्रारम्भ हुआ।
सभा को सम्बोधित करते हुए जनपद अध्यक्ष अश्विनी कुमार राय बोले कि सरकार सेवा निवृत कर्मचारियों में विभेद पैदा करते हुए 1.1.2026 के पूर्व सेवानिवृत कर्मचारियों को महंगाई भता आदि लाभ नहीं देना चाहती है। ऐसा जान पड़ता है कि महंगाई की मार 1.1.2026 के पूर्व सेवानिवृत कर्मचारियों पर नहीं पड़ेगा। बोले कि इसके लिए एक मंच पर सभी सेवा निवृत कर्मचारियों व पेंशनरों को आकर सरकार से दो दो हाथ करने को तैयार रहना पड़ेगा, इसके अतिरिक्त अन्य कोई रास्ता नहीं है। उन्होंने सेवानिवृत कर्मचारियों व शिक्षकों की मऊ के स्तर पर एक समन्वय समिति अथवा संयुक्त मोर्चा बनाकर सरकार से एक साथ लड़ना पड़ेगा।
जिला मंत्री इं सीताराम वर्मा बोले कि सरकार की मंशा सेवानिवृत कर्मचारियों की पेंशन और अन्य लाभ छीनने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इसके लिए प्रांतीय कार्यकारिणी के निर्देशों पर प्रत्येक आंदोलन में बढ़ चढ़ कर भाग लेना पड़ेगा।
सभा का संचालन करते हुए जिला संरक्षक सीताराम कुशवाहा नें ललकारते हुए कहा कि सरकार यदि पेंशनरों की मांगों को शीघ्रतिशीघ्र नहीं मानती है तो आगामी चुनाव में उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
कोषाध्यक्ष उमेश राय नें चेताया कि सरकार सेवानिवृत कर्मचारियों को कमजोर न समझे यदि पेंशनर अपनी पर आ गए तो सरकार बदल देंगे।
उत्तर प्रदेश के प्रदेशीय सेवा निवृत प्राथमिक शिक्षक कल्याण परिषद मऊ के जिलाध्यक्ष जनार्दन सिंह नें विस्तार से बताया कि सरकार नें जब जब शिक्षकों कर्मचारियों के साथ छल किया है या तो सरकार ही बदल गई है या मुख्यमंत्री ही बदल गए हैं। उदाहरण देते हुए बोले कि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को मुख्यमंत्री पद ही छोड़ना पड़ा और मुख्य मंत्री के रुप में तत्कालीन मुख्यमंत्री को शिक्षकों की सारी मांगे माननी पड़ी थी। बोले कि अब समय आ गया है कि सभी सेवानिवृत कर्मचारी व शिक्षक एक मंच पर आकर सरकार से प्रभावी तरीके से लड़ना पड़ेगा, अन्य कोई विकल्प शेष नहीं है। उन्होंने भी सेवानिवृत कर्मचारियों -शिक्षकों की एक समन्वय समिति शीघ्रतिशीघ्र बनाने पर जोर दिए ताकि आगे आने वाले आंदोलन में वृहद संख्या बल के साथ लड़ाई लड़ी जा सके।
अपने सभाध्यक्षीय सम्बोधन में श्रीराम सिंह जी नें सरकार को ललकारते हुए बोले की सरकार को होश में आना होगा और सेवानिवृत पेंशनर कर्मचारियों शिक्षकों की सभी 12सूत्रीय मांगों को मानना पड़ेगा अन्यथा पेंशनर अपने परिवार के साथ विरोध में मतदान कर देंगे तो सरकार ही बदल जाएगी।
सभा को पी एन सिंह धर्मदेव गुप्ता दुलारी देवी ओ पी सिंह शिक्षक परमानंद पाण्डेय आशा पाण्डेय सहित तमाम वक्तावों नें सम्बोधित करते हुए हुंकार भरे कि
सरकार यदि हमारी मांगे नहीं मानती है तो ईंट से ईंट बजाया जायेगा।
सभा के अंत में माननीय प्रधानमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली एवं माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार लखनऊ को संबोधित 12 सूत्रीय माँग पत्रों से संबंधित ज्ञापन सिटी मजिस्ट्रेट मऊ के हाथों में सौंपा गया जिस पर सिटी मजिस्ट्रेट नें आश्वासन दिए कि यह ज्ञापन माननीय प्रधानमंत्री व मनननीय मुख्यमंत्री को तत्काल मेरे स्तर से प्रेषित कर दिया जायेगा।
उपरोक्त माँग पत्र में मुख्य रुप से वित्त विधेयक 2025 में पेंशनरों में तिथि के आधार पर विभेद पैदा करने वाले अंश को हटाते हुए पुराने पेंशनरों को आठवीं वेतन आयोग की सीमा में लाया जाए, वेतन आयोग की प्रक्रिया में हो रहे विलंब को दृष्टि में रखते हुए पर्याप्त अंतरिम सहायता सभी कर्मचारी शिक्षकों एवं पेंशनरों को स्वीकृत की जाए, भारत सरकार के राजपत्र दिनांक 29 अगस्त 2008 में प्रकाशित निर्णय के अनुसार कर्मचारी पेंशनरों शिक्षकों के लिए अलग सी. पी. आई.बनाई जाए, टेंशन माननीय उच्चतम न्यायालय की पूर्ण पीठ के निर्णय अनुसार लंबी सेवा अवधि का लंबित वेतन है वह नान कंट्रीब्यूटरी वह अनफंडेड नहीं है इसके लिए ओ. पी. एस.बहाल की जाए, पेंशनरों के राशिकरण की कटौती 10 वर्ष पर बंद कर दी जाए, 65 वर्ष की आयु पूर्ण होने के पश्चात प्रत्येक 5 वर्ष पर पांच प्रतिशत पेंशन की वृद्धि की जाए, पेंशन को आयकर से मुक्त रखा जाए, करोड़ों कल के 18 महीने के डी. ए./डी. आर.के एरिया का भुगतान किया जाए, वरिष्ठ नागरिकों को रेल किराए में 50% की छूट दी जाए, आयुष्मान भारत में कैशलेस उपचार करने की सीमा को 10 लाख किया जाए, महंगाई भत्ता 50% से अधिक होने पर उसे मूल वेतन/ पेंशन में मर्ज किया जाए सहित वरिष्ठ नागरिकों हेतु वरिष्ठ नागरिक आयोग का गठन किया जाना सम्मिलित रही।

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