सन्त शिरोमणि रैदास जी दया के सागर थे।
स्थानीय कस्बा मेहनगर के लखरांव पोखरा रविदास धर्म शाला में एक सभा की गई, जिसमें बहुत से गांवों के लोग जूलूस लेकर एकत्रित हुए। जिसके मुख्य अतिथि पूर्व विधायक रामजग राम और विशिष्ट अतिथि उमेश सिंह उर्फ जयशंकर सिंह विश्व हिन्दू परिषद जिला अध्यक्ष रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ रैदास जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए प्रारंभ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अध्यापक रामपति , और संचालन विरेन्द्र ने किया। व्यवस्थापक डाक्टर भरथ गौतम ने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि सन्त रविदास जी की 123 वीं जयंती हम लोग बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मना रहे हैं, सन्त रविदास जी समाज सुधारक , आध्यात्मिक सन्त रहे, जो बचपन से ही दयालु प्रवृत्ति के रहे, जीवों पर दया करना मानो उनका धर्म था। मानवता का संदेश देते हुए जात पात के बन्धन से उपर उठकर कार्य किया। इनकी एक प्रसिद्ध कहानी है, एक बार रैदास जी अपनी कुटिया में बैठकर जूता बना रहे थे, कि कुछ भक्त गंगा जी में स्नान करने जा रहे थे।कि उसमें से एक भक्त ने रैदास जी को देखकर गंगा स्नान करने के लिए आग्रह किया, लेकिन रैदास जी के पास समय का अभाव रहने के कारण वह गंगा स्नान करने नहीं जा सकते, उन्होंने कहा कि यह गंगा मैया के लिए हमारे तरफ से एक दमड़ी ले जाकर दे देना । इतना ध्यान रहे कि जब गंगा मैया हाथ निकाल कर स्वीकार करें तभी देना। वह भक्त स्नान ध्यान करने के बाद गंगा मैया से विनती किया कि हे गंगा मैया आपका एक भक्त रैदास एक दमड़ी दिया है जिसे आप स्वीकार करें, भक्त यह देखकर हैरान हो गया ,जब गंगा मैया ने हाथ निकालकर उसे दमड़ी को स्वीकार करते हुए एक सोने का कंगन रैदास जी को देने के लिए बोली उस भक्त को सोने का कंगन देखकर लालच आ गई, उस कंगन को राजा के पास बेचने के लिए गया, सुन्दर कंगन देखकर राजा ने रानी को दिखाया, तो रानी ने कहा कि इसका जोड़ा कंगन लाकर हमें दे दो , यह बात सुनकर भक्त ने राजा से सारी बातें बताई, राजा ने स्वयं रैदास जी के पास आकर जोड़ा कंगन के लिए आग्रह किया। राजा की बात को सुनकर रैदास जी मुस्कराते हुए बोला कि मन चंगा तो कठौती में गंगा यह कहकर कठौती में से सोने का कंगन दिया। इस अवसर पर पूर्व व्यापार मंडल अध्यक्ष कमलेश मधुकर, शशिकांत सेठ, रत्नेश चतुर्वेदी उर्फ पप्पू बाबा, मोहित सरोज सभासद, त्रिवेणी गुप्ता सभासद, राजू सरोज सभासद, डाक्टर जियालाल गौतम किसान सभा जिला सचिव, रूदल, रामप्रसाद, अरविंद यादव, प्रकाश सेठ, रामलोचन, लक्षिराम, लोकनाथ, ओमप्रकाश नैय्यर,शतीश, राजू, राजेश,इनरू, विजय, इन्द्रप्रताप, इन्दू, चन्द्र शेखर आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।

