“रील के चक्कर में रियल कोभुलते नौजवान “

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लेख:जय प्रकाश श्रीवास्तव
पत्रकार

दोस्तों कैसे हैं आप सब उम्मीद है आप सब लोग ठीक-ठाक होंगें। ठंड बहुत अत्यधिक पड़ रही है अपने आप की रक्षा और सुरक्षा स्वयं करनी है इसलिए ठंड से और घमंड से बचकर रहें क्योंकि दोनों में व्यक्ति अकड़ जाता है। आज हम बात कर रहे हैं आज के समाज की आज की युवा पीढ़ी इस कदर रील में व्यस्त है कि उसे रियल लाइफ के बारे में कुछ सोचना ही नहीं है। बहुत से लोगों ने आज कल रील को ही अपने जीवन का सच्चा साथी बना लिया है।जहां देखो वहां रील बना रहे हैं चाहे वह समाज का अश्लील से अश्लील दृश्य क्यों ना हो?क्या हमारे हिंदू समाज की सभ्यता संस्कृति,शालीनता, पारिवारिक रिश्ते, सामाजिक रिश्ते, दोस्त मित्र,रिश्तेदार और यहां तक की बूढ़े बुजुर्गों का आदर,मान सम्मान, यह सब क्या पैसा कमाने के चक्कर में नई पीढ़ी भूल सी गई है? जिसके लिए हमारी भारत माता जानी जातीं हैं।अरे दोस्तों हमारा देश तो जाना जाता है उन वीर योद्धाओं के लिए उनके शौर्य के लिए, जिन वीरों ने सोने की चिड़िया कहे जाने वाले अपने देश को बचाने के लिए कम उम्र में ही फांसी के फंदे को चूम लिया।क्या आज यह वही देश है,वही संस्कृति है, वही परंपरा है?जिसकी उन्होंने कल्पना की थी नहीं बिल्कुल नहीं। हां मैं मानता हूं कि भारत आज तरक्की के क्षेत्र में बहुत ऊपर चला गया है परंतु इस तरह की चीजों से नौजवानों पर यदि अंकुश ना लगाया गया तो यही नौजवान जो आने वाले हमारे भविष्य हैं ये रील के चक्कर में रियल भूल जाएंगे और अपना देश पुनः गुलामी की जंजीरों में बंध जाएगा। जिस प्रकार से फिल्मों में सेंसर बोर्ड की नजर होती है ठीक उसी प्रकार से रील बनाने वालों पर भी अंकुश लगाना आवश्यक है अन्यथा हमारे समाज में अश्लीलता इस कदर फैल जाएगी की आने वाले समय में लोग बहन, बेटियों को भी नहीं पहचानेंगे।और हां रील बनाने में व्यस्त अपने देश की बालिकाओं और महिलाओं से भी एक निवेदन है कि कृपया भारत देश की संस्कृति सभ्यता और किस वजह से हमारा देश पूरे संसार में जाना जाता है कृपया एक बार पुस्तकों में पढ़ लें। कृपया पैसे कमाने के चक्कर में अंग्रेजों के रीति रिवाज और सभ्यता को ना अपनाएं।याद करीये एक तरफ वो नौजवान थें जिनका नाम भगत सिंह,राजगुरु, रामप्रसाद बिस्मिल जो लगभग 19 से 23 साल की उम्र के थे और अपने देश की आजादी के लिए उन्होंने फांसी के फंदे को चुम लिया। आज के नौजवान भी फांसी लगा रहे हैं परंतु किस लिए लगा रहे हैं यह पूरा समाज जान रहा है मेरे समझ से इसको बताने की आवश्यकता नहीं। इसलिए सभी भारतवासियों से निवेदन है कि जागो और अपनी संस्कृति को बचाओ अन्यथा यह रील रियल को खत्म कर देगी।।

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