मऊ। संदीप श्रीवास्तव की रिपोर्ट
प्रदेश सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा कर रही है। एक रुपये की पर्ची पर निःशुल्क इलाज, मुफ्त दवाइयों तथा आधुनिक जांच सुविधाओं जैसी योजनाओं का व्यापक प्रचार भी किया जा रहा है। लेकिन मऊ जनपद के जिला चिकित्सालय की मौजूदा स्थिति इन दावों पर कई सवाल खड़े करती दिखाई दे रही है।
जिला अस्पताल पहुंचे मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल की डिजिटल एक्स-रे मशीन पिछले लगभग तीन से चार महीनों से खराब पड़ी है। इसके कारण मरीजों को मजबूरन निजी जांच केंद्रों पर जाकर महंगे दामों में डिजिटल एक्स-रे कराना पड़ रहा है।
इसी प्रकार अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट के अभाव में अल्ट्रासाउंड जांच नियमित रूप से नहीं हो पा रही है। परिणामस्वरूप मरीजों को निजी केंद्रों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
वहीं, मरीजों ने यह शिकायत भी की कि प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों पर कई आवश्यक दवाइयां अक्सर उपलब्ध नहीं रहतीं। ऐसे में उन्हें बाजार से महंगी कीमत पर दवाइयां खरीदने के लिए विवश होना पड़ता है। यदि यह स्थिति लगातार बनी रहती है तो सरकार की सस्ती एवं सुलभ दवा उपलब्ध कराने की मंशा भी प्रभावित होती नजर आती है।
स्वास्थ्य सेवाओं की ऐसी स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिला मुख्यालय के अस्पताल में ही मूलभूत जांच सुविधाएं बाधित हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जिला अस्पताल में डिजिटल एक्स-रे मशीन कब तक ठीक होगी, रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था कब की जाएगी और मरीजों को अस्पताल परिसर में ही सभी आवश्यक जांच सुविधाएं कब उपलब्ध हो सकेंगी। लोगों की निगाहें अब स्वास्थ्य विभाग और शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

