मोहम्मदपुर (आजमगढ़)। प्रदेश सरकार जहां बेहतर बिजली व्यवस्था और त्वरित शिकायत निस्तारण के दावे कर रही है, वहीं आजमगढ़ जनपद के विद्युत उपखंड मोहम्मदपुर क्षेत्र में बिजली विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में खराब पड़े ट्रांसफार्मर के कारण करीब 10 से 15 परिवार कई दिनों से अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं, लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
स्थानीय उपभोक्ताओं के अनुसार ट्रांसफार्मर खराब होने के बाद बिजली विभाग की 1912 हेल्पलाइन पर लगातार चार बार शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत संख्या PU04062608749 (04 जून 2026), PU06062609064 (06 जून 2026), PU07062605404 (07 जून 2026) और PU08062606163 (08 जून 2026) दर्ज होने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया। आरोप है कि शिकायतों के निस्तारण के बजाय उन्हें केवल औपचारिकता तक सीमित रखा गया।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) और उपखंड अधिकारी (एसडीओ) को कई बार अवगत कराने के बावजूद ट्रांसफार्मर बदलने की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इससे क्षेत्र के लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
भीषण गर्मी के बीच बिजली आपूर्ति ठप होने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पेयजल संकट गहराने लगा है, मोबाइल चार्जिंग, विद्यार्थियों की पढ़ाई और दैनिक जीवन से जुड़े कई जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब चार-चार शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या 1912 हेल्पलाइन केवल शिकायत दर्ज करने का माध्यम बनकर रह गई है? क्या विभागीय अधिकारियों को आम जनता की परेशानियों की कोई चिंता नहीं है? साथ ही लोगों ने यह भी पूछा है कि क्या उच्च अधिकारियों को वास्तविक स्थिति की जानकारी दी गई है और क्या शासन स्तर से जारी निर्देशों का पालन जमीनी स्तर पर हो रहा है?
क्षेत्रीय जनता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, ऊर्जा मंत्री और यूपीपीसीएल के उच्च अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए तथा खराब ट्रांसफार्मर को शीघ्र बदलकर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए।
लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना केवल तकनीकी लापरवाही नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अब सभी की निगाहें शासन और ऊर्जा विभाग पर टिकी हैं कि अंधेरे में जीवन बिता रहे परिवारों को आखिर कब राहत मिलती है।
